दिल में है कोई बात तो आओ गिला करो
जब भी मिला करो हमें खुल कर मिला करो
वो भी हँसेगा आप अगर मुस्कुराओगे
इक बार शुरू आप ज़रा सिलसिला करो
आना पड़ेगा आपको आखिर ज़मीन पर
चाहे किसी मकान को सौ मंजिला करो
रखदे न बात बात में जड़ से उखाड़ कर
इन सरफिरी हवाओं से न यूँ हिला करो
सबका नसीब एक सा होता नहीं 'रवि'
खारों को किस तरह कहें तुम भी खिला करो
Saturday, March 8, 2008
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